परेशानी का सबब बने रेलवे अंडर ब्रिज, बांसखेड़ी अंडरब्रिज में भरा कई फुट पानी, म्याना में भी बुरा हाल


गुना। बांसखेड़ी स्थित रेल अंडरब्रिज में बारिश का पानी भरने से स्थानीय रहवासी वर्षों से परेशानी उठा रहे हैं। यहां बारिश के अलावा अन्य दिनों में भी थोड़ी सी बारिश में अंडरब्रिज की पुलिया कई फुट पानी में डूब जाती है। यहां बांसखेड़ी से मुहालपुर सहित शहर के अन्य हिस्सों में आने-जाने का रास्ता बंद हो जाता है। जिससे यहां के लोग जान जोखिम में डालकर पटरी से निकल रहे हैं। यहां बांसखेड़ी, घोसीपुरा में किसी व्यक्ति की मौत होने पर बीच रास्ते में पानी भरे अंडरब्रिज के कारण मालपुर रोड स्थित श्मशाम तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। रेलवे की इस लापरवाही के कारण बासंखेड़ी, घोसीपुरा, मालपुर रोड सहित आसपास के रहवासियों में आक्रोश है। लोगों का कहना था कि पिछले कई सालों से रेल अंडर पास में भरने वाले पानी की समस्या हल करने प्रशासन और रेल अधिकारियों से कह रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। समस्या से परेशान आक्रोशित रहवासी पूर्व में पटरी पर भी बैठ गए थे। लेकिन समस्या का हल नहीं हो सका। लोगों की मांग है कि रेल अंडरब्रिज में पानी भरने की समस्या का स्थाई समाधान किया जाए।

म्याना का अंडरब्रिज भी दुर्दशा का शिकार 

 जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर म्याना कस्बे में भी रेलवे द्वारा बनाया गया अंडरब्रिज लोगों के लिए आफत बना हुआ है। वहाँ भी लगातार अंडरब्रिज का रखरखाव न होने से ब्रिज में पानी भरना ओर ब्रिज से सरिए निकलना आम बात हो गईं है। ऐसे में हर समय हादसों की आशंका बनी हुई है। कस्बेवासियों का कहना है कि इसी अंडरब्रिज से लोगों का आना-जाना उत्तरप्रदेश तक होता है लेकिन अंडरब्रिज की देखभाल और रखरखाव ठीक से न होने के साथ ही लगातार पानी भरने से ब्रिज की सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। कई बार अधिकारियों का ध्यानाकर्षण विभिन्न माध्यमों से कराने के बाद भी रेलवे प्रशासन द्वारा स्थाई समाधान नहीं किया जा रहा है। म्याना की आबादी लगभग 15 हजार की है और इसी रास्तें पर आस पास के कई गांव लगे हुए हैं।

कई बार आंदोलन और ज्ञापन दें चुके ग्रामीण

इस अंडर ब्रिज की समस्या को लेकर ग्रामीण कई बार रेल्वे प्रशासन, जनप्रतिनियों, विधायक गण, थाना प्रभारी, जिला प्रशासन कलेक्टर को कई बार लिखित एबं मौखिक अवगत करा चुके हैं। लेकिन आज तक कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला गया है पूर्व में भी एक बार जनता ने आक्रोशित होकर ट्रेन को भी रोक दिया था। परन्तु इतना होने के बाद भी रेलवे प्रशासन क्या चाहता है यह समझ से परे है ऐसा लगता है रेल्वे प्रशासन जनता द्वारा बड़े ओर उग्र आंदोलन के इंतजार में है।

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