कांग्रेस दलित को आगे करके राजनीति रोटी सेक रही - भाजपा

भाजपा ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर लगाए कांग्रेस साम्प्रदायिक सोहार्द बिगाडऩे के आरोप

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गुना। (प्रदेश केसरी) जगनपुर चक पर हुई घटना में कांग्रेस जातिगत और सामाजिक समरसता बिगडऩे का प्रयास कर रही है, जबकि जगनपुर पर अतिक्रमण के बाद दलित को आगे करने की घटना एक सुनियोजित षड्यंत्र है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह दलितों के प्रति संवेदनशील हैं और उन्होंने प्रथम दृष्टया जिले के कलेक्टर एसपी को हटा दिया है, पूरे मामले की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए हैं जांच में जो तथ्य सामने आएंगे जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएंगा। यह बात भाजपा के पंचयात एवं ग्रामीण मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, सांसद केपी यादव और पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य ने एक संयुक्त पत्रकारवार्ता के दौरान कही। इस मौके पर विधायक गोपीलाल जाटव, भाजपा जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह सिकरवार और पूर्व विधायक ममता मीना भी मौजूद थीं। नेताओं ने कहा कि शहर से पांच किमी दूर जगनपुर चक पर शासकीय बीस बीघा जमीन उत्कृष्ट महाविद्यालय के लिए कांग्रेस सरकार में आवंटित की गई है। इसके लिए 12 करोड़ रूपये की राशि मंजूर है। शहर के विकास के लिए उक्त महाविद्यालय निर्माण जरूरी है। समय रहते अगर काम शुरू नहीं होता है तो उक्त  राशि लैप्स हो जाएगी। 14 जुलाई को गब्बू पारदी को जैसे ही यह भनक लगी कि प्रशासन उसकी अतिक्रमण वाली जमीन पर कब्जा हटाने आ रहा है तो षणयंत्र रचकर एक दलित दंपत्ति को जहर खाने के लिए उकसाया ताकि प्रशासन डरकर पीछे हटे और जमीन पर उसका कब्जा बना रहे। गब्बू पारदी का न्यायालय के क्वार्टर आवंटन सहित 60 बीघा बेशकीमती जमीन पर कब्जा है और उस पर हत्या, हत्या के प्रयास सहित लगभग दो दर्जन से अधिक अपराध दर्ज है। घटना के वीडियो देखने से स्पष्ट होता है कि राजस्व एवं पुलिस अमला जैसे ही मौके पर पहुंचा तो पूर्व नियोजित योजना के तहत गब्बू पारदी के इशारे पर राजकुमार एवं उसकी पत्नी को जहर खाने को उकसाया, इस दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि मौके पर जहर उपलब्ध होना और प्रयोजित तरीके से हंगामा करना दर्शाता है कि यह घटना सुनियोजित थी। कांग्रेस के पास में वर्तमान में कोई मुद्दा नहीं है तो वह ऐसी घटनाओं को सामाजिक रंग देकर राजनीति करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस के लोग मप्र के सामाजिक वातावरण को बिगाडऩे का षडयंत्र कर रहे है। क्योंकि समाज में फूट डालना और उपद्रव काराना कांग्रेस की संस्कृति का हिस्सा है। गुना की इस घटना से किसी समाज विशेष से कोई लेना देना नहीं है। बल्कि वह अतिक्रमणकर्ता और अतिक्रमण हटाने गए प्रशासनिक अमले के बीच हुए विवाद का विषय है। भाजपा नेताओं ने कहा कि  इस मामले को मुख्यमंत्री शिराजसिंह चौहान ने अंत्यत गंभीरता से लेते हुए गुना के कलेक्टर, एसपी और रेंज के आईजी को संतोषजनक जवाब न देने के कारण तुंरत प्रभाव से हटा दिया।

कांग्रेस के षणयंत्र की आ रही है बू

गुना की घटना एक प्रश्न छोड़ गयी है कि आखिर किसकी शह पर गब्बू पारदी ने इस जमीन पर कब्जा करने की हिम्मत जुटाई। हम चाहते है कि इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की भूमिका की जांच करानी चाहिए। क्योंकि इस भूमि से नवंबर 2019 में बेदखली की कार्यवाही शुरू की गयी थी, जिसे राजनैतिक दबाव के चलते रोक दिया गया था। स्वभाविक है कांग्रेस के शासनकाल में यह दबाव किसका रहा होगा? कांग्रेस इस घटना के बहाने अपने शासनकाल के पाप छुपाना चाहती है और प्रदेश के सामाजिक वातावरण में जातिवाद का जहर घोलना चाहती है। सदैव से ही घटनाओं में जाति और संप्रदाय ढूंढना कांग्रेस का स्वभाव बन गया है।

विकास में नहीं आएगी बाधा

पंचायत एवं ग्रामीण मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि जिले के विकास में बाधा नहीं आने देंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश और जिले के विकास के लिए संकल्पित हैं। उनके नेतृत्व में 12 करोड़ की लागत से युवाओं को उत्कृष्ट महाविद्यालय बनवाया जाएगा। भाजपा का विश्वास विकास में है हम युवाओं की शिक्षा और रोजगार के लिए हर संभव काम करेंगे कांग्रेस चाहे जितना रोड़ा अटका ले हम रुकने वाले नहीं है।

 नेताओं ने किए कांग्रेस से सबाल

- क्या सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की छूट दी जानी चाहिए ?
- क्या अपराधी की कोई जाति होती है ?
- क्या राजनेताओं को अपने स्वार्थ सिद्धी के लिए इस प्रकार के गरीब लोगों को आगे करके अपराध की दुनिया मेंझौंकना चाहिए ?
- अगर किसान ने ढाई लाख कर्ज लिया था तो किस साहूकार अथवा बैंक से लिए था। इसकी जांच हो और सच सामने आना चाहिए ?
-कांग्रेस ने अपने शासन काल में गब्बू पर कार्रवाही क्यों नहीं की, कांग्रेस और गब्बू के संबंध उजागर होना चाहिए ?

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