दिग्विजय की सिंधिया को खुली चुनौती, ट्वीट कर साधा निशाना

सिंधिया जी- “पिछली सरकार में भ्रष्टाचार हुआ” उन्हें खुली चुनौती है, नीचे विभागों का एक भ्रष्टाचार बतायें, वर्ना जनता से क्षमा माँगे


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भोपाल। (प्रदेश केसरी) उपचुनाव से पहले मप्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेजी से चल रहा है। विपक्ष द्वारा राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सरकार में उनके समर्थक मंत्रियों को लेकर निशाना साधा जा रहा है। चाहे मुद्दा कोई भी हो सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक कांग्रेस सिंधिया को निशाना बना रही है।अब पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सिंधिया के कमलनाथ सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों लगाने वाले बयान पर पलटवार किया है और सिंधिया को चुनौती तक दे डाली है।दिग्विजय की इस चुनौती ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
दिग्विजय ने ट्वीटर के माध्यम से सिंधिया को पिछली सरकार के भ्रष्टाचार उजागर करने की चुनौती दी है। दिग्विजय ने ट्वीट कर लिखा है कि सिंधिया जी-“पिछली सरकार में भ्रष्टाचार हुआ”, उन्हें खुली चुनौती है,नीचे विभागों का एक भ्रष्टाचार बतायें,वर्ना जनता से क्षमा माँगे। दिग्विजय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, परिवहन, श्रम, स्कूली शिक्षाराजस्व, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति में हुए भ्रष्टाचार का ब्यौरा मांगा है। खास बात यह है कि दिग्विजय सिंह ने उन विभागों के भ्रष्टाचार की बात की है जो पिछली कमलनाथ सरकार में सिंधिया समर्थक मंत्रियों के पास थे। बता दें कि कमलनाथ सरकार में गोविंद सिंह के पास परिवहन, प्रभुराम चौधरी के पास शिक्षा, इमरती देवी के पास महिला-बाल विकास, प्रदुम्नन सिंह के पास खाद्य आपूर्ति जैसे विभाग थे। अब देखना है कि सिंंधिया या फिर उनके समर्थकों मंत्रियों की तरफ से इसका क्या जवाब आता है। फिलहाल सिंधिया या किसी भी भाजपा नेता द्वारा इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नही आई है।
यह पहला मौका नही है जब दिग्विजय ने सिंधिया पर हमला बोला हो। इसके पहले भी दिग्विजय कई बार सिंधिया को आड़े हाथों ले चुके है। हाल ही में दिग्विजय ने ट्वीट कर लिखा था कि महाराज भाजपा के कृषि मंत्री कमल पटेल कहते है “किसानों का क़र्ज़ माफ करना पाप है”। क्या आप उनके बयान से सहमत हैं ? यदि शिवराज चौहान कॉंग्रेस सरकार ने किसानों का क़र्ज़ माफ़ करने की जो प्रक्रिया शुरू की थी वह उसे पूरा नहीं करते हैं तो क्या आप मप्र सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेंगे ?

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