लैब टेक्नीशियनों के भरोसे मरीज का कोरोना सैंपल से लेकर टेस्टिंग रिपोर्ट तक का काम, स्टॉफ की कमी से ब्लड बैंक और पैथालॉजी का काम प्रभावित

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गुुना। अपनी अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चाओं में रहने वाला जिला अस्पताल कोरोना संक्रमण काल में बदत्तर हालातों के दौर से गुजर रहा है। जिस कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। उस कोरोना की जांच में अस्पताल प्रबंधन द्वारा भारी लापरवाही बरती जा रही है। मरीज का कोरोना सैंपल से लेकर मशीन में टेस्टिंग और रिर्पोटिंग तक का काम पूरी तरह लैब टैक्निशियन के कंधों पर डाल दिया गया है। कोरोना से संबंधित किसी भी कार्य मेें सीनियर से लेकर जूनियर डॉक्टरों दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। ब्लड बैंक और पैथालॉजी में कार्यरत 10-12 लैब टैक्निशियन ही जिला अस्पताल में बिना सुरक्षा इंतजामों के मरीजों के सैंपल ले रहे हैं। जबकि कोरोना सैंपल की टेस्टिंग विशेषज्ञ पैथालॉजिस्ट या डॉक्टर की निगरानी में होना चाहिए। कोरोना जैसी गंभीर बीमारी में डॉक्टर की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। जिसके चलते जिला अस्पताल में टू्रनेट मशीन से आने वाली पॉजीटिव रिपोर्ट पर स्वयं डॉक्टरों को विश्वास नहीं है। वहीं काम का बोझ बढऩे के कारण पैथालॉजी एवं ब्लडबैंक का न सिर्फ काम प्रभावित हो रहा है बल्कि इसका असर जांच रिपोर्टों की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है।

काम प्रभावित होने के कारण ब्लड बैंक में लगानी पड़ी सूचना


जिला अस्पताल में लैब टैक्निशियन की भारी कमी और जिम्मेदारों द्वारा अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाने के कारण स्वयं अस्पताल प्रबंधन को काम प्रभावित होने की सार्वजनिक सूचना चस्पा करनी पड़ी। ब्लड बैंक में लगी एक आवश्यक सूचनाओं में कहा गया कि 'वर्तमान में कोविड-19 में ब्लड बैंक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाने के कारण स्टॉफ की कमी है। अत: प्रायवेट अस्पताल से जिला चिकित्सालय गुना में रक्तकोष में ब्लड लेने हेतु आने वाले परिजनों को सूचित किया जाता है कि जब भी प्रायवेट अस्पतालों से रक्त की आवश्यकता हो तब प्रात: 9.00 बजे से दोपहर 2.00 बजे तक ही ब्लड डिमांड फार्म स्वीकार किए जाएंगे। वहीं रक्त प्रदाय करने में लगभग 1 से 2 घंटे का समय लगता है। इसमें किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें। उपरोक्त समय के उपरांत विशेष इमरजेंसी वाले मरीज के ही ब्लड डिमांड फार्म स्वीकार किए जाएंगे। इनमें एक्सीडेंट, ऑपरेशन इत्यादि शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ही नहीं कर रहे टू्रनेट मशीन की रिपोर्ट पर विश्वास

इधर जिला अस्पताल में कोरोना की जांच करने वाली मशीन तो लग गई है। लेकिन इसके विशेषज्ञ नहीं होने के कारण इसकी रिपोर्टें संदिग्ध के दायरे में है। लैब टेक्निशियनों के भरोसे चल रही टू्रनेट मशीन से अगर जांच की भी गई तो रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर स्वयं विभाग के अधिकारी इस पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित का सैंपल पुन: ग्वालियर भेजा जाता है। ऐसा ही वाकया गत दिनों सिटी कोतवाली में पदस्थ आरक्षक की रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद हुआ था। गौरतलब हो कि इमरजेंसी में कोरोना सैंपलों की जांच के लिए जिला अस्पताल में भले ही मशीन लगा दी गई हो, लेकिन अफसरों को अभी इसकी रिपोर्ट पर पूरा भरोसा नहीं है। टू्रनेट मशीन की रिपोर्ट को प्रामाणिकता की कसौटी पर खरा आंकने के लिए स्वास्थ्य महकमा ग्वालियर लैब की रिपोर्ट से मिलान कराने के बाद ही आखिरी मुहर लगाई जाती है। अगर दोनों रिपोर्ट एक जैसी आती हैं तो टू्रनेट मशीन की रिपोर्ट पक्की मानी जाती है। इस बारे में सीएमएचओ डॉ. पी बुनकर से बात करना चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

इनका कहना है

- स्टॉफ की कमी के कारण यदि काम प्रभावित हो रहा है तो मैं दिखवाता हूं। हम अस्पताल में व्यवस्थाएं सुधारने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। एक-दो दिन में बैठक कर नए स्टॉफ को भर्ती को लेकर चर्चा की जाएगी।- एस विश्वनाथन, कलेक्टर गुना
- नए लैब टेक्निशियनों की भर्ती जल्द की जा रही है। इसकी प्रक्रिया जारी है। डॉक्टरों का काम व्यवस्था बनाना और उपचार करना है। जांच तो लैब टेक्निशियनों को ही करना है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 20 से 22 रिपोर्ट की जांच की जाती है। रही बात ट्रूनेट मशीन की विश्वसनीयता की तो रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद इसकी कन्फॉर्मेशन के लिए सैंपल ग्वालियर भेजे जाते हैं।- डॉ. एसके श्रीवास्तव, सिविल सर्जन

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