गुरुओं का मार्गदर्शन एवं सानिध्य पाकर जीवन उन्नत होता है - मुनिश्री निरीह सागरजी महाराज

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गुना। (प्रदेश केसरी) यदि माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों में मंदिर में जाकर जिनेन्द्र भगवान के दर्शन करने के संस्कार आएं तो इसके लिए माता पिता को स्वयं पहल करनी होगी। इसके लिए माता पिता अपने घर के बच्चों को सुबह जल्दी उठने की आदत डालें। उन्हें नहलाकर साफ वस्त्रों को पहनाकर उनके हाथ में द्रव्य देकर उन्हें देव दर्शन के लिए मंदिर भेजें। जब माता-पिता अथवा घर के वरिष्ठ सदस्य बच्चों को प्रतिदिन जिनेंद्र देव के दर्शन के लिए मंदिर के लिए भेजेंगे तो स्वाभाविक है कि धीरे-धीरे बच्चों में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के संस्कार भी  आ जाएंगे। इस प्रकार की धार्मिक सदोपदेशना आरोन में चातुर्मास कर रहे मुनिश्री अभयसागर जी के संघस्थ मुनिश्री निरीह सागरजी महाराज ने श्रावकों को आशीर्वचन देते हुए कही। उन्होंने अपनी बात को विस्तार देते हुए उदाहरस्वरूप एक कहानी भी सुनाई एवं कहाकि यदि माता पिता अथवा घर के वरिष्ठजन जब बच्चों को मंदिर ही नहीं भेजेंगे तो फिर उनमें धार्मिक संस्कारों का वीजा रोपण कैसे होगा। इसलिए बच्चों में धार्मिक संस्कारों की स्थापना करने के लिए घर के वरिष्ठ जनों का योगदान आवश्यक है। यदि माता-पिता बच्चों में धार्मिक संस्कारों को देने में किसी प्रकार से सफल नहीं हो पा रहे हैं । अथवा बच्चे माता पिता एवं घर के वरिष्ठजनों के कहे अनुसार अथवा आपकी बात नहीं मान रहे हैं तब ऐसी स्थिति में अपने बच्चों को गुरुओं के पास ले जाना चाहिए। गुरु हमेशा सदमार्ग पर लगाकर सबके जीवन को मंगलमय बना देते हैं। वे हमारे जीवन को एक सही दिशा प्रदान करते हैं । गुरुओं के मार्गदर्शन एवं सानिध्य को पाकर सबका जीवन उन्नत हो जाता है।  

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