संवेनदशील जिले में ज्ञापन लेने और समस्याएं सुनने में अधिकारियों की अरूचि


ज्ञापन के दौरान डिप्टी कलेक्टर के व्यवहार से नाराज जागरूक ग्रुप ने की सीएम से शिकायत

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गुना। (प्रदेश केसरी) राजनीतिक एवं सामाजिक दृष्टि से संवेनशील बने हुए जिले को वर्तमान में सरल, सहज और संवेदशील अधिकारियों की कमी खल रही है। जिले में कलेक्टर और एसपी को छोड़ दिया जाए तो कलेक्टोरेट के ए.सी. कक्षों में फाईलों के पन्ने पलटते अधिकांश अधिकारी-कर्मचारियों की असंवेदनहीनता के कारण यहां अपनी समस्याओं को लेकर आने वाले आमलोगों एवं जरूरतमंद लोग परेशान हो रहे हैं। जिला मुख्यालय पर पदस्थ कुछ डिप्टी कलेक्टरों से लेकर अधिकांश विभाग प्रमुखों के लापरवाह और गैर जिम्मेदाराना रवैया के कारण आम लोग सिर्फ कलेक्टर को ही अपनी व्यथा सुनाना चाहते हैं। क्योंकि हर व्यक्ति को कलेक्टर से ही सही और सच्चे न्याय की उम्मीद होती है। उच्च अधिकारियों को ऐसा बर्ताव अक्सर आमजन के साथ मीडिया में चर्चा का विषय रहता है। जिसके चलते कई बार तो अधिकारियों पर गाज भी गिर चुकी है। जिसमें विगत महीने लॉकडाउन के दौरान एक महिला अधिकारी द्वारा आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार के बाद शासन ने उन्हें चलता कर दिया था। कुछ ऐसी ही बेरूखी इन दिनों डिप्टी कलेक्टर आर.बी. सिण्डोसकर द्वारा ज्ञापन लेने के दौरान दिखाई जा रही है। जिसके खिलाफ आम लोगों के साथ शहर के राजनीतिक दलों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
दरअसल गत दिवस जागरूक ग्रुप द्वारा पार्किंग और यातायात पुलिस को लेकर एक ज्ञापन कलेक्टर की अनुपस्थिति में डिप्टी कलेक्टर श्री सिण्डोसकर  को दिया गया था। डी.सी. के व्यवहार से नाराज जागरूक ग्रुप ने इसकी शिकायत ट्विटर के माध्यम से सीएम, पूर्व सांसद सिंधिया से लेकर उच्च अधिकारियों तक की है। सीएम को किए ट्वीट में ग्रुप ने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक होने के बाद भी ज्ञापन लेने का जो तरीका है वो फोटो में आप स्वंय देख सकते है।
इस बारे में ग्रुप के सदस्य अमित तिवारी ने बताया कि ज्ञापन देने के दौरान कुछ अलग तरह का अनुभव हुआ और ये समझ आया कि आखिर क्या वजह होती है कि लोग सिर्फ कलेक्टर को ही अपनी व्यथा सुनाना चाहते हैं। अधिकारी जनता के सेवक के रूप में काम करते है और जनता को आपसे न्याय की उम्मीद होती है। लोग काफी उम्मीदें लेकर आप तक पहुँचते है काफी देर इंतजार के बाद अधिकारियों से मिलना हो पाता है।
ऐसे में अधिकारियों को समझना चाहिए कि वे जनता की बात को गंभीरता से सुने समस्या का हल निकाले ताकि आवेदक संतुष्ट हो और कम से कम इस तरह का व्यवहार लोगो के साथ कतई न करें ।

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