फीस के लिए दबाव बना रहे निजी स्कूल, मिलीभगत के कारण अधिकारी नहीं कर रहे कार्रवाई

पत्रकारवार्ता में पेरेंट्स एसोसिएशन ने लगाए आरोप

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गुना। (प्रदेश केसरी) कोरोना महामारी के दौरान निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ संषर्घ कर रहे पेरेंट्स एसोसिएशन द्वारा सोमवार को पत्रकारवार्ता आयोजित कर निजी स्कूलों की अधिकारियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कार्रवाई नहीं करने की बात कही। इस मौके पर पेरेंट्स एसोसिएशन ने कहा पढ़ाई नहीं तो फीस नहीं। फीस के लिए स्कूल दबाव न बनाएं। इसको लेकर पूर्व में कई बार अधिकारियों से शिकायत कह गई, लेकिन अधिकारी इसको लेकर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पत्रकार वार्ता में पेरेंट्स एसोसिएशन ऑफ गुना ने बताया कि द्वारा 15 जून को शहर के निजी स्कूलों की मनमानी और विभिन्न समस्याओं को लेकर दो अलग-अलग ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपे। जिसमें कलेक्टर के नाम दिए ज्ञापन में एसोसिएशन ने निजी विद्यालयों द्वारा फीस, ड्रेस बदलने एवं लंबे समय तक ऑनलाइन क्लासेज के संबंध में शिकायत की गई। वहीं राज्यपाल के नाम सौंपे ज्ञापन में विभिन्न मुद्दों को उठाया। कलेक्टर के नाम दिए ज्ञापन में कहा गया कि गुना के कई निजी विद्यालयों द्वारा निरंतर फीस के लिए फोन, एसएमएस किए जा रहे हैं। साथ ही कुछ स्कूलों द्वारा ड्रेस बदलने, एनसीईआरटी के अतिरिक्त किताबें खरीदने पर  दवाब बनाया जा रहा है। वहीं कुछ विद्यालयों द्वारा क्लास नर्सरी से ऑनलाइन क्लास चलाई जा रही है जो सर्वथा अनुचित है।
इसी क्रम में जिला शिक्षा अधिकारी के नाम पेरेंट्स एसोसिएशन ऑफ गुना द्वारा पुन: एक ज्ञापन दिया गया। जिसमें उल्लेख किया गया कि निजी विद्यालयों द्वारा जो फीस की मांग की जा रही है वह पूर्णता अनुचित है क्योंकि प्रदेश के चार हाईकोर्ट में फीस को लेकर विभिन्न अभिभावक संघ द्वारा आपने बात प्रस्तुत किए गए हैं। तब भी स्कूल प्रशासन लगातार फीस के लिए दबाव बना रहे हैं। जब जिला शिक्षा अधिकारी से बात की तो उन्होंने एसोसिएशन से कोर्ट के फैसलों के दस्तावेज मांगे जो उन्हें अगले ही दिन उपलब्ध भी करवा दिए गए। लेकिन उनके द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। जबकि शहर के एक नामी विद्यालय द्वारा कक्षा 8 से कक्षा 9 वीं में री-एडमिशन के लिए पालक को स्कूल बुलवाया तथा फॉर्म के 100 एडमिशन के 500 तथा अन्य फीस भी वसूल की गई। जिससे समाचार पत्र में भी छापा किंतु कोई कार्यवाही नहीं की गई। यह भी तब हुआ जब पूर्णता स्कूल बंद की घोषणा सरकार द्वारा की गई थी।
वर्तमान में स्कूलों द्वारा वीडियो के माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही हैं। जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि कक्षा 6 से ऊपर की कक्षाओं में 45 मिनट अधिकतम की 2 क्लास होगी। किंतु वंदना कान्वेंट स्कूल द्वारा तीन क्लास प्रतिदिन लगाई जाती है और यदि आप उनकी क्लास के ऑडियो वीडियो देखें तो आप समझ सकेंगे की आवाज भी क्लियर नहीं आती कभी डाटा नहीं होता तो कभी क्लास बीच में भी बंद हो जाती है। एक बार तो हद ही हो गई कक्षा 8 सेक्शन ब में किसी व्यक्ति द्वारा बच्चों के साथ अश्लील भाषा का प्रयोग किया गया। एसोसिएशन ने कहा कि मुख्य बात अब विद्यालयों द्वारा फीस के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें निरंतर मैसेज भेजे जा रहे हैं। साथ ही टीचर्स द्वारा फोन भी लगाए जा रहे हैं मना करने पर या यह कहने पर कि जब स्कूल ही नहीं लग रहा है तो फिर किस बात की तो वह अलग-अलग बातें बना रहे हैं। कभी कहते हैं हम ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं और कभी एक धमकी भी होती है कि बच्चों को तो आगे भी पढ़ाना है यानी वह नाम काट देंगे। इस मौके पर पेरेंट्स एसोसिएशन ने स्पष्ट कहा कि जब हमने स्कूल भेजा ही नहीं ना ही किसी प्रकार की आप से ट्यूशन ली तो हम फीस क्यों भरें। साथ ही सभी स्कूलों को हम कहना चाहते हैं कि वह अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताडि़त करना बंद कर दें। पत्रकारवार्ता में मांग की गई कि स्कूलों की वार्षिक बैलेन्स शीट ओपन की जाए ताकि शिक्षा व्यापार नहीं हो। वहीं जब तक संक्रमण की स्थिति काबू में नहीं आती स्कूल न खोले की मांग करते हुए कहा कि हमारे बच्चे टेस्टिंग किट नहीं इसलिए सत्र को शून्य घोषित किया जाए। स्कूलों द्वारा फीस की भीख ना मांगी जाए। शिक्षा के व्यवसायीकरण पर सरकार को गंभीरता से तुरंत रोक लगाई जाए।

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