पवित्रा एकादशी के दिन हुई थी पुष्टिभक्ति मार्ग की स्थापना

गुरुवार को पवित्रा के हिंडोलों में झूलेंगे भगवान बालकृष्ण

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गुना। (प्रदेश केसरी) श्रावण मास में पवित्रा एकादशी का विशेष महत्व है। इस अवसर पर अखंड अष्टाक्षर मंत्र एवं भगवन्नाम जाप के साथ हिंडोला महोत्सव में श्री ठाकुर जी को पवित्रा धारण कराए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद मप्र के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन के अनुसार पुत्रदा एकादशी को पुष्टिमार्ग में पवित्रा एकादशी कहा जाता है। आज श्री ठाकुर जी को पवित्रा धराए जाते हैं। पवित्रा एकादशी से रक्षा बंधन तक पांच दिन श्रृंगार पश्चात पवित्रा धराए जाते हैं एवं 'पवित्रा पहरत गिरधर लाल,  सुंदर श्याम छबीला नागर, सकल घोष प्रतिपालÓ आदि अष्टछाप के कवियों के पदों का गायन किया जाता है। सभी पुष्टिमार्गीय केंद्रों पर पवित्रा एकादशी का पर्व 30 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन को पुष्टिमार्गीय मार्ग का प्राकट्य दिवस कहा जाता है। इस वर्ष वर्तमान कोरोना काल को देखते हुए एवं सर्वजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पवित्रा महोत्सव में अधिकांश पुष्टिमार्गीय आचार्य प्रत्यक्ष सम्मुख न होकर परोक्ष में पवित्र भाव रखते हुए वैष्णवों के बीच उपस्थित रहेंगे।

पुष्टिमार्गीय केंद्रों पर हिंडोला महोत्सव की धूम

मध्यांचल के पुष्टि भक्ति केंद्रों पर इन दिनों श्रावण मास के तहत 32 दिवस तक चलने वाले हिंडोला महोत्सव की धूम है। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि श्रावण की एकम से प्रारंभ हुए हिंडोला महोत्सव का समापन 6 अगस्त को हिंडोला सुरंग के साथ होगा। अंचल के करीब 250 ग्रामों सहित शहरी क्षेत्र के सत्संग मंडलों एवं श्रीनाथ जी के मंदिरों एवं निजी गृहों में श्रावण मास में भगवान श्रीकृष्ण को हिंडोला में झुलाने की प्राचीन परंपरा है। 7 जुलाई से पुष्टिमार्गीय मंदिरों में चल रहे 32 दिवसीय हिंडोला महोत्सव का समापन 6 अगस्त को श्रावण कृष्ण कज्जली तीज को होगा।

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