औपचारिकता में सिमटता किल कोरोना अभियान, सर्वे कार्य से नदारद ड्यूटी कर्मचारी

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कंधे पर आया सर्वे का बोझ, तहसीलदार से की शिकायत


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गुना। कोरोना के खिलाफ किल कोरोना अभियान चलाकर प्रशासन जिस निर्णायक जंग को जीतने की तैयारी कर रहा है उसमें प्रशासन द्वारा ड्यूटी पर लगाए गए कुछ अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा जमकर मखौल उड़ा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा डोर-टू-डोर स्वास्थ्य सर्वे को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। लेकिन गैर जिम्मेदार यह अधिकारी-कर्मचारी सर्वे ड्यूटी से नदारद हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सर्वे की पूरी जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायिका एवं एएनएम पर आ गई है। पांच-पांच सदस्यों की बनाई टीम में मात्र तीन-तीन कर्मचारी ही मैदानी स्तर पर सर्वे कर रहे हैं। इसमें अधिकांश आशा, आंगनवाड़ी एवं एएनएम कार्यकर्ता हैं। ड्यूटी से नदारद कर्मचारियों की शिकायत लेकर गुरुवार को उक्त स्वास्थ्य सर्वे की टीमें तहसील कार्यालय पहुंची। यहां उन्होंने तहसीलदार एवं इन्सीडेंट कमांडर को दिए शिकायती आवेदन में बताया कि कोविद-19 सर्वे में कलेक्टर द्वारा पांच सदस्यों की टीम बनाकर स्वास्थ्य सर्वे की ड्यूटी लगाई थी। जिसमें एक टीम में शामिल नीलम शर्मा, उमा चंदेल एवं शमीना बेगम ही सर्वे कर रही हैं। जबकि उनके साथ ड्यूटी पर लगाए गए शिक्षक रामेश्वर शर्मा एवं अनिल चौहान नदारद हैं। कुछ ऐसा ही हाल एक अन्य टीम के साथ था। जिसमें शामिल कमलनयन मिश्रा, सुनीता सेन एवं माला परिहार ही ड्यूटी कर रहे हैं। जबकि कृषि विभाग के एमडी प्रजापति एवं सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ रजनी जंडेल ड्यूटी से गायब हैं। कोरोना सर्वे कार्य में लगाई गई पांच सदस्यों की टीम में से दो सदस्य गायब होने के कारण सर्वे कार्य बहुत जद तक पिछड़ रहा है। वहीं सर्वे टीमों में सिर्फ महिलाएं होने के कारण उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है। सर्वे कार्य में लगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि सर्वे टीम से दो पुरूष शिक्षक गायब होने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है।

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