गुना जिले सहित प्रदेश भर में बिजली के बिल दे रहे झटका

संबल योजना के हितग्राहियों को थमा दिये हजारों रूपये के बिजली बिल

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गुना। (प्रदेश केसरी) कोरोना काल में बिजली के बिल हर वर्ग के लोगों को झटका दे रहे है। शहर से लेकर गांव तक बिजली बिलों को देखकर ही लोगों को करंट का झटका लग जाता है। शिवराज सरकार के दावे कुछ भी हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयाँ कर रही है। जिलें में बिजली बिल थमाने वाली कंपनी अपने अनुमानित बिजली बिलों से लोगों के पसीने निकाल रही है। आज जिलें सहित प्रदेश भर के लोगों को इन बिलों को देखकर कमलनाथ सरकार की यादें ताजा हो रही है, जब हर वर्ग के लोगों के बिजली के बिल आज की अपेक्षा नाम मात्र के बिल आतें थें। इस विसंगति को लेकर गुना जिले में बिजली बिलों को लेकर लेाग अपनी नाराजगी जता चुके है। ताजा मामला चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र के मधुसूदनगढ़ क्षेत्र का सामने आया है जहां मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी संबल योजना के हितग्राहियों को ही बिजली कंपनी ने हजारों रूपये के बिल थमा दिये है। हजारों रूपये के बिजली बिल देखकर परेशान ग्रामीणों ने सोमवार को इस आशय की शिकायत तहसीलदार से की है। इसके पूर्व सभी उपभोक्ता विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही 
केे कारण संबल योजना से वंचित उपभोक्ता नाराज होकर विद्युत ऑफिसर से अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे लेकिन वहां कोई सुनवाई नही की गई। लोगों का आरोप है कि लॉकडाउन के समय मे विद्युत विभाग की तरफ से 3 महीनों के अंदर कोई भी कर्मचारी मीटर रीडिंग लेने नहीं आया, जबकि हर महीने बिजली का बिल उपभोक्ता को भेजा गया। हर महीने बिजली का बिल जमा करने के बाद भी इस जुलाई माह में दस-दस हजार रुपयों का बिल थमा दिए गए। जिससे 3 महीनों की मीटर रीडिंग इकट्टी होने से संबल योजना के तहत लाभ नहीं मिल पाया। मधुसूदनगढ़ के राजीव नगर धक्कापूरा के रहने वाले लक्ष्मण, राममोहन, पूरन सेलर, बाबू, गोविंद मेर, राजेश आदि ने बताया कि इस बार बिजली विभाग द्वारा बिना रीडिंग लिये अनुमानित बिल भेजे है, जो अनुमान से कहीं ज्यादा है। हम लोगों को तीन हजार से दस हजार रूपये तक के बिजली के बिल थमा दिये गये है। जबकि सभी बिल संबल योजना के अंतर्गत है। ग्रामीणों ने बिजली बिल कम किये जाने की मांग 
तहसीलदार से की है।

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