आज से गणेश उत्सव शुरू, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

आज न करें चन्द्र दर्शन 

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उज्जैन। (प्रदेश केसरी) आज भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर देशभर में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जा रहा है। कोरोना महामारी की वजह से इस बार गणेश पूजा कार्यक्रम बड़े स्तर पर नहीं हो रहे। लोग सुबह से ही गणपति की मूर्तियों को श्रद्धापूर्वक घरों में स्थापित कर उनकी पूजा करेंगे। गणपति को घर लाकर विराजमान करने से लेकर उनके विसर्जन को भी धूमधाम से करते हैं। 10 दिन चलने वाले इस त्योहार पर गणपति की स्थापना की जाती है। गणेश उत्सव भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतर्दर्शी तक यानी दस दिनों तक चलता है। इसके बाद चतुर्दशी को इनका विसर्जन किया जाता है। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार इस दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश जी का जन्म मध्यान्ह में हुआ था। ऐसे में इस दिन गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर यथोपलब्ध सामग्री दूर्वा एवं मोदक से पूर्जा अर्चना की जानी चाहिए। इस बार  चतुर्थी तिथि 21 अगस्त को रात्रि 11.02 से शुरू होकर 22 अगस्त शाम 07:56 तक रहेगी। मान्यता है कि श्री गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था।

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त 

पूजा का शुभ मुहर्त पूर्वाह्न 11 बजकर सात मिनट से दोपहर एक बजकर 42 मिनट तक
दूसरा शाम चार बजकर 23 मिनट से सात बजकर 22 मिनट तक
रात में नौ बजकर 12 मिनट से 11 बजकर 23 मिनट तक है।

पूजा सामग्री

पान, सुपारी, लड्डू, सिंदूर, दूर्वा

गणेश चतुर्थी पूजा विधि 

गणेश चतुर्थी के दिन प्रातः काल स्नान-ध्यान करके गणपति के व्रत का संकल्प लें। इसके बाद दोपहर के समय गणपति की मूर्ति या फिर उनका चित्र लाल कपड़े के ऊपर रखें। फिर गंगाजल छिड़कने के बाद भगवान गणेश का आह्वान करें। भगवान गणेश को पुष्प, सिंदूर, जनेऊ और दूर्वा (घास) चढ़ाए। इसके बाद गणपति को मोदक लड्डू चढ़ाएं, मंत्रोच्चार से उनका पूजन करें। गणेश जी की कथा पढ़ें या सुनें, गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें। भगवान की पूजा करें और लाल वस्त्र चौकी पर बिछाकर स्थान दें। इसके साथ ही एक कलश में जलभरकर उसके ऊपर नारियल रखकर चौकी के पास रख दें। दोनों समय गणपति की आरती, चालीसा का पाठ करें। प्रसाद में लड्डू का वितरण करें।

गणेश मंत्र 

पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करें, प्रसाद के रूप में मोदक और लड्डू वितरित करें।
  • ऊं गं गणपतये नम:।
  • ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
  • ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।
  • गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:।
  • ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश।
  • ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, मेरे दूर करो क्लेश।
सभी विघ्न दूर करने के लिए गणेश भक्त बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं साथ ही उनकी आरती भी गाते है।

गणेश जी की आरती 

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।। ..
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।

गणेश चुतर्थी पर न देखें चांद

गणेश चुतर्थी को चंद्रमा को देखना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है भगवान गणेश ने चांद को एक बार श्राप दिया था चतुर्थी के दिन जो भी तुझे देखेगा उस पर कलंक लगेगा। तब से लोग चतु्र्थी का चांद नहीं देखते।



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