प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि 31 अगस्‍त

कलेक्‍टर श्री पुरूषोत्‍तम द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) एवं मुख्‍य कार्यपालन अधिकारियों को दिये गये निर्देश 

CLICK -  

गुना। (प्रदेश केसरी) कलेक्‍टर कुमार पुरूषोत्‍तम द्वारा जिले के समस्‍त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) एवं मुख्‍य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिये गए हैं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत 31 अगस्त 2020 तक फसल बीमा कराये जाना है। कृषक का जिस बैंक में बचत खाता है उसी बैंक या कियोस्क सर्विस सेंटरों पर फसल बीमा कराया जाना है। उन्‍होंने कम समय को देखते हुए निर्देशित किया है कि वे अपने-अमले को यह कार्य कराने हेतु निर्देशित करें। फसल बुबाई प्रमाण पत्र जारी करने हेतु पटवारी एवं ग्राम पंचायत के सचिव को शासन द्वारा अधिकृत किया गया है। फसल बीमा कराने हेतु आधार कार्ड, पहचान पत्र (शासन द्वारा मान्य दस्तावेज जैसे- वोटर कार्ड, राशन कार्ड, पेन कार्ड, समग्र आईडी, ड्राईविंग लायसेंस इत्यादि), बुबाई प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की छायाप्रति भू अधिकार पुस्तिका अनिवार्य किये गये हैं। जिन्हें लेकर कृषक बैंक/कियोस्क सर्विस सेंटर पर फसल का बीमा करा सकते हैं। उन्‍होंने कृषकों को बुबाई प्रमाण पत्र जारी करने हेतु पटवारियों एवं सचिवों को निर्देशित किया है कि वे उनके क्षेत्र में उपस्थित रहकर बोनी प्रमाण पत्र जारी करें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्‍य प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति होने पर बीमित कृषकों को क्षतिपूर्ति उपधब्‍ध करके वित्‍तीय समर्थन प्रदान करना है। ताकि कृषक, कृषि व्‍यवसाय में बने रहते हुए उन्‍नत तकनीकि का उपयोग एवं टिकाउ-नवीन, अभिनव कृषि हेतु प्रोत्‍साहित करना है।
बीमित फसल के अंतर्गत जिला स्‍तर पर उड़द एवं मूंग, तहसील स्‍तर पर ज्‍वार, कोदोकुटकी- मूंगफली, तिल एवं कपास तथा पटवारी हल्‍का स्‍तर पर धान सिंचित, धान असिंचित, सोयाबीन, मक्‍का, बाजरा तथा अरहर अधिसूचित की गयी है। 

एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और 7 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कायाकल्‍प अभियान योजनांतर्गत पुरूस्‍कृत

गुना। मुख्‍य चिकित्‍सा एवं जिला स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी डॉ.पी.बुनकर ने बताया कि सरकारी अस्पतालों को बेहतर और स्वच्छ बनाने के मकसद से शुरू किए गए ''कायाकल्प अभियान के 2019-20'' के चयनित संस्थाओं को प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा गुरुवार को मंत्रालय से वी.सी. के माध्यम से अवार्ड वितरित किए। उन्‍होंने बताया कि वर्ष 2019-20 के कायाकल्प अवार्ड में 1 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और 7 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ने बाजी मारी। बेहतर कार्य के सुधार में जिला अस्पताल गुना को मोटीवेशनल में रखा गया है। जिले में वाश इन हेल्थ कार्यक्रम के चलते हुए इस वर्ष कायाकल्प अवार्ड में बढ़ोतरी हुई है। वाश इन हेल्थ के जिला सलाहकार श्री विनय शर्मा ने समस्त सीएचसी, पीएचसी, पर वायो मेडीकल बेस्ट, ईन्फेक्शन कंट्रोल, सुरक्षित पेयजल और अस्पताल परिसर पर साफ-सफाई, टायँलेट की सफाई और संबंधित रिकार्ड पर निगरानी करते रहे है। जिससे गुना जिले में कायाकल्प में अधिक-अधिक संस्था आ सकी। मुख्‍य चिकित्‍सा एवं जिला स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी डॉ.बुनकर, वॉश नोडल डॉ. सरोजिनी जेम्स बैक द्वारा भी कायाकल्प अभियान में संस्था पर निगरानी कर संस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए। कायाकल्प में उत्कृष्ठ कार्य करने वाली संस्था प्रभारी व स्टॉफ ने रूवि लेकर संस्था में कार्य किए गए। 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बुनकर द्वारा समस्त संस्था प्रभारी एवं स्टॉफ को बधाई दी। साथ ही वाश कंस्लटेंट श्री विनय शर्मा को भी इस उपलिब्ध पर बधाई दी। कायाकल्प में उत्कृष्ठ कार्य करने बाली संस्थाओं में सी.एच.सी.राधौगढ़, पी.एच.सी. मधुसुधनगढ, पी.एच.सी.जामनेर,  पी.एच.सी.रूठियाई, पी.एच.सी.भदौरा, पी.एच.सी.बजरंगगढ, पी.एच.सी. पनवाडी हाट तथा पी.एच.सी. फतेहगढ़ शामिल है।

खेती-किसानी फसल में कीट-व्‍याधि प्रकोप से बचने किसान भाईयों को कृषि विभाग ने दी सलाह


गुना। उपसंचालक कृषि अशोक कुमार उपाध्याय द्वारा विकासखण्ड राघौगढ़ के ग्राम सोरामपुरा, गोविन्दपुरा, सुरंदरखेड़ी, नारायाणपुरा, प्रेमगढ, टोडरा, गावरी में खरीफ फसल में कीट एवं रोग से अचानक पीली पड़ रही सोयाबीन की फसल का निरीक्षण किया गया। उन्‍होंने खरीफ फसलों में कीट एवं रोग नियंत्रण के संबंध में कृषि विभाग के मैदानी अमले को निर्देशित किया कि वे कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी कृषि विज्ञान केन्द्र आरोन के वैज्ञानिकों के साथ लगातार ग्रामों का भम्रण करें। कृषकों को खरीफ फसलों में कीट एवं रोग नियत्रण हेतु कीट एवं रोग की पहचान एवं नियत्रंण हेतु अनुसंसित कीट नाशक एवं फफूंद नाशक दवाओं की जानकारी के साथ समसमायिक सलाह कृषकों को समय पर दें। इस अवसर पर कृषकों से भी चर्चा की। उन्‍होंने बताया कि जिले में 5 डायग्नोस्टिक टीमों का विकास स्तर पर गठन किया गया है। जो कि सतत भम्रण कर कृषकों को कीट एवं रोगों के नियंत्रण हेतु सलाह दे रहे है। सोयाबीन फसल पर मुख्य रूप से तना मक्खी का प्रकोप पाया गया है। इस कीट का लक्षण सोयाबीन की पत्तिया पीली पड़ने लगती है। इल्ली तने के अंदर अण्डा रखती है। 5 से 7 दिन में अण्डे इल्ली में बदल कर पौधे के तने को खाती है। तने को चीर कर देखने पर खोखला तना एवं कीट का विस्टा दिखाई देता है। 
उन्‍होंने जिले के किसान भाईयों से आग्रह किया है कि वे अपने खेत में पीलापन दिखाई पड़ते ही एवं पीलापन दिखाई देने से पहले ही सोयाबीन के पौधे को निकाल कर इस कीट की पहचान तुरंत करें। इस कीट के नियंत्रण हेतु थायक्लोप्रिड 750 मिली या बीटासायफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड 300 से 400 मिली या थायोमिथाकजाम + लेमडा सायहेलोथ्रिन 200 मिली प्रति हेक्टेयर का छिडकाव की सलाह एवं अनुशंसा कृषकों को दी गई। सोयाबीन फसल पर एंथ्रेकनोज एवं राईजोक्टोनिया रॉट राईजोक्टोनिया एरियल व्‍लाईट रोग के नियत्रंण हेतु कृषकों को हैक्साकोनाजोल 800 मिली प्रति हेक्टेयर या टेब्यूकोनाजोल 625 मिली प्रति हेक्टेयर का छिडकाव कि सलाह दी गई।

Post a Comment

0 Comments