भाईयों की कलाईयों पर आज सजेगा बहनों का प्यार और रक्षा सूत्र

क्षाबंधन पर 12 घंटे का शुभ मुहूर्त, सालों बाद बना खास संयोग

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गुना। (प्रदेश केसरी) हर वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 3 अगस्त, सोमवार को पड़ा है। रक्षाबंधन का त्योहार बहिन और भाई के आपसी प्रेम और स्नेह का त्योहार है। इस पर्व में बहिनें अपने भाईयों की कलाई में राखी बांधती है। रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के समय भद्राकाल और राहुकाल का विशेष ध्यान दिया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में राखी बांधना शुभ नहीं होता है। इसलिए रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल में विशेष ध्यान दिया जाता है। मान्यता है कि भद्राकाल में किसी भी तरह के शुभ कार्य करने पर उसमें सफलता नहीं मिलती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा में राखी न बंधवाने के पीछे एक कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार लंका के राजा रावण ने अपनी बहिन से भद्रा के समय ही राखी बंधवाई थी। भद्राकाल में राखी बाधने के कारण ही रावण का सर्वनाश हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर जब भी भद्रा लगी रहती है उस समय बहिनें अपने भाइयों की कलाई में राखी नहीं बांधती है। इसके अलावा भद्राकाल में भगवान शिव तांडव नृत्य करते हैं। इस कारण से भी भद्रा में शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

यह है भद्रा और राहुकाल का समय

रक्षा बंधन के दिन सुबह 9 बजकर 28 मिनट से रात्रि 9 बजकर 27 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा। 3 अगस्त को श्रावण मास का आखिरी और पांचवां सोमवार भी है। सावन में बन रहे इस शुभ संयोग ने रक्षा सूत्र के इस पर्व को और खास बना दिया है। ध्यान रहें कि सुबह 9 बजकर 27 मिनट तक भद्राकाल होने से बहन भाई को राखी ना बांधें। इस दिन सुबह साढ़े 7 बजे से 9 बजे तक राहुकाल रहेगा। इन दोनों के होने से रक्षा बंधन सुबह 9 बजकर 28 मिनट के बाद ही मनाना शुभ है। श्रावण पूर्णिमा श्रवण नक्षत्र में मनाई जाती है। श्रवण नक्षत्र प्रात: 7 बजकर 18 मिनट से आरंभ होगा, इस दौरान पूर्णिमा तिथि का संयोग रात 9 बजकर 27 मिनट तक ही रहेगा। इसके बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा आरंभ हो जाएगी। यह एक शून्य तिथि मानी जाती है, इसमें राखी बांधना भी शुभ नहीं माना जाता है।

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