क्राइस्ट स्कूल में ट्यूशन फीस वसूलने के खिलाफ लामबंद हुए पालक

हंगामा देख मौके पर पहुँचे प्रभारी एसडीएम एवं डीईओ

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गुना। (प्रदेश केसरी) क्राइस्ट स्कूल में ट्यूशन फीस के नाम पर स्कूल प्रबंधन द्वारा की जा रही मनमानी के खिलाफ बुधवार को बड़ी संख्या में बच्चों के अभिभावक लामबंद हो गए। सैकड़ों की संख्या में स्कूल पहुंचे अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ आक्रोश जताया। इस दौरान घंटों तक चले हंगामे के बीच मौके पर प्रभारी एसडीएम संदीप श्रीवास्तव, डीईओ आरएल उपाध्याय मौके पर पहुंचे। यहां उन्होंने स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों से चर्चा की। इधर कोविद-19 में आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे बच्चो के अभिभावकों के साथ बात करने स्कूल प्राचार्य ने अपने चैंबर से बाहर निकलना भी उचित नहीं समझा। स्कूल प्रबंधन की इस हठधार्मिता और मनमानी के खिलाफ पालकों में जमकर गुस्सा निकाला। हालांकि तमाम बातचीत के बाजवूद स्कूल प्रबंधन अपनी जिद पर अड़ा रहा। जिस पर पेरेंट्स एसोसिएशन के बैनर तले अभिभावकों ने सड़क पर उतरकर आंदोलन की चेतावनी दी है।
इस स्कूल प्राचार्य के साथ तीन सदस्यों की टीम ने बात की। इस मौके पर पैरेंट्स एसोसिएशन मनोज श्रीवास्तव, विकास टांटिया ने बताया कि  स्कूल प्रशासन जबरन ऑनलाइन एग्जाम के नाम पर फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहा है। साथ ही यह भी कह रहा है यदि फीस जमा नहीं करी तो बच्चों को एग्जाम में नहीं बैठने दिया जाएगा। इस एग्जाम के नंबर फाइनल में भी जोड़े जाएंगे। यह सब तब हो रहा है जब हाईकोर्ट द्वारा अभी तारीख दी गई है। साथ ही भारत सरकार ने भी स्कूल खुलने एवं स्कूल के कोर्स के संचालन के कोई भी नियम अभी लागू नहीं किया है।

विरोध बढ़ता देख प्रबंधन ने बनाए बहाने

इस मौके पर अभिभावकों ने स्कूल परिसर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम वीडियो बनाकर स्कूल की मनमानी को उजागर किया। पालकों की मांग है कि जब बच्चे स्कूल ही नहीं जा रहे हैं तो फीस किस बात की। अभिभावकों के विरोध बढ़ता देख स्कूल प्रबंधन का मनगढ़त बहाने बनाने लगा। स्कूल प्रबंधन के अनुसार पिछले साल के जिन लोगों ने फीस जमा नहीं की उन्हें मैसेज किए गए है। जबकि मौके पर उपस्थित अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चों की पिछले साल की फीस जमा है। वहीं बड़ा सवाल यह है कि जब पिछले साल की फीस जमा नहीं की तो स्कूल ने कैसे  रिजल्ट घोषित कर दिया ? अमूनन प्रायवेट स्कूल फीस जमा नहीं करने पर रिजल्ट ही घोषित नहीं करते हैं। अपनी पोल खुलते देख यहां स्कूल प्रबंधन ने एक-एक करके अंदर आकर बात करने की बात कही। इस दौरान अभिभावकों ने मौके पर अंग्रेजी में वार्तालाप का विरोध किया। इस अवसर पर मौके पर उपस्थित एक पालक का कहना है कि हम मोबाईल पर बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। घर में एक मोबाईल है जो हम बच्चों को नहीं दे सकते।



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