इंदौर को मिली सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सौगात, मुख्यमंत्री शिवराज ने किया लोकार्पण

इंदौर। (प्रदेश केसरी) मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिली है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को इंदौर में 237 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त दस मंजिला सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए, जबकि मुख्यमंत्री इंदौर में आयोजित भव्य समारोह में मौजूद थे। लोकार्पण समारोह में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट और ऊषा ठाकुर, इंदौर सांसद शंकर लालवानी, विधायक आकाश विजयवर्गीय और अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।
इंदौर कमिश्नर डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त यह सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल 10 मंजिला है। इस अस्पताल में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, मेडिकल गेस्ट्रोएन्ट्रोलॉजी, सर्जीकल गेस्ट्रोएन्ट्रोलॉजी, प्लास्टिक एवं रिकन्सट्रक्टीव सर्जरी तथा आर्गन ट्रांन्सप्लांट की सुविधा रहेगी। यह अस्पताल 402 बिस्तरों का है। इसमें मुख्य रूप से जनरल वार्ड में 208 बिस्तर रहेंगे। शेष बिस्तर आईसीयू, आपातकालीन, प्रायवेट एवं सेमी प्रायवेट आदि वार्ड में भी रहेंगे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में सुपर स्पेशलिटी सेंटर कोविड-19 (डी.सी.एच.) सेन्टर के रूप में प्रारम्भ होगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारम्भ करने के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, भोपाल द्वारा 24 पीजीएमओ, 112 मेडिकल ऑफिसर, 253 नर्सेस, 204 सफाई कर्मचारी एवं 102 सुरक्षाकर्मी के पद स्वीकृत किये गये हैं। यह व्यवस्था आगामी तीन माह के लिए की गयी है। नियमित पदों की भर्ती विधिवत सुपर स्पशलिटी अस्पताल प्रारम्भ होने के पश्चात् की जायेगी।

सुपर स्पेशलिटी सेंटर - अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ आपूर्ति

विभिन्न रोगों के तीव्रतम निदान हेतु उच्चतम तकनीकों का स्थान जैसे सभी एंडोस्कापी एवं सुक्ष्म प्रतिबिंब (इमेज) आधारित जांचें, शल्य क्रिया के बिना बीमारियों के आधुनिक तकनीकों से सटीक उपचार जैसे लेप्रास्कोपी इत्यादि जो वर्तमान व्यवस्था में सुलभता से उपलब्ध नहीं है, आपातकालीन स्वास्थ्य परिस्थितियों से हृदयाघात, पक्षाघात, गुर्दे की बीमारियों में दक्ष तकनीकों से त्वरित समाधान उपलब्ध करवाना, अंग प्रत्यारोपण का सुव्यवस्थित संस्थापन, अंगदान हेतु जागरूकता बढ़ाना तथा हृदय, गुर्दे, यकृत और फेफड़ों के दान, उनके प्रत्यारोपण हेतु आधुनिकतम सुविधाओं को मुहैया करवाना, शल्य चिकित्सा की नवीनतम और उच्चतम तकनीकों का समुचित संधारण, विशेष रूप से गैर संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और निर्वारण हेतु स्वास्थ्य शिक्षा एवं उचित उपायों का प्रचार प्रसार एवं क्रियान्वयन आदि कार्य किये जायेंगे।

सुपर स्पेशलिटी सेंटर आरंभ करने के पीछे भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य

उच्चतम गुणवत्ता का उपचार वाजिब आर्थिक मूल्यों पर उपलब्ध करवाना, चिकित्सा के क्षेत्र में आधुनिकतम तकनीकी संसाधनों का लाभ जन-जन तक पहुंचाना, आपातकालीन उपचारों को जनता की पहुंच में सरल और सुलभ बनाना, समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए मुफ्त, न्यूनतम दामों पर आधुनिक चिकित्सा सुविधा सुलभ करवाना, गुणात्मक चिकित्सा सेवाओं का प्रभावी एवं सुचारू प्रतिपादन करना, नैदानिक एवं उपचारात्मक शोध हेतु वांछित संसाधनों का प्रावधान रखना, प्रशिक्षण एवं स्वास्थ्य शिक्षा को एक निरंतर सतत् क्रियाशील व्यवस्था के रूप में प्रतिष्ठित करना इस सेंटर का उद्देश्य है।

सुपर स्पेशलिटी सेंटर की सुविधाओं के हितग्राहियों का व्यापक दायरा

इसका लाभ भौगोलिक रूप से इंदौर संभाग ही नहीं बल्कि उज्जैन संभाग के 15 जिलों में निवासित जनसंख्या और महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान से निकट होने की वजह से सीमावर्ती इलाकों की भी बहुसंख्यक जनता को मिलेगा। स्वास्थ्य संबंधी आवश्कताओं की पूर्ति का इंदौर केंद्र स्थल है। इंदौर सडक़, ट्रेन एवं हवाई यातायात के माध्यम से देश के प्रत्येक हिस्से से जुड़ा हुआ है।

सुपर स्पेशलिटी सेंटर के आरंभ होने पर नवीन रोजगार अवसरों का सृजन

सुपर स्पेशलिटी सेंटर के लिए शासन द्वारा विभिन्न पद संवर्गों के लगभग एक हजार नवीन पदों को सृजित कर उन्हें स्वीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध होंगे। इसके अलावा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भी रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे।

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