गुना कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश को लेकर दो तरह की व्यवस्थाएं, एक से साहब जन तो दूसरें से आम जन कर रहें प्रवेश

कलेक्टोरेट के प्रवेश द्वार से सिर्फ अधिकारियों का ही प्रवेश, आम लोगों को घूमकर जाना पड़ता है


गुना। (प्रदेश केसरी) जिले का नया कलेक्ट्रेट भवन सर्व सुविधा युक्त है, विशाल है और साहब लोगों के लिए बहुत आरामदायक है। लेकिन सिर्फ साहब लोगों के लिए। इसकी बानगी देखने के लिए ज्यादा जांच पड़ताल की आवश्यकता नहीं है। कलेक्ट्रेट का प्रवेश द्वार ही बता देता है कि यह अधिकारियों की सुविधा के लिए हैं या आमजन की सुविधा के लिए। दरअसल कोरोनावायरस संक्रमण को देखते हुए प्रत्येक सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में काफी ज्यादा एहतियात बरते जा रहे हैं। लेकिन कलेक्ट्रेट में एहतियात सिर्फ आला अधिकारियों के लिए हैं, आमजन के लिए कुछ नहीं। मिसाल के तौर पर कलेक्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर एक नाका बनाया गया है। इस नाके की खासियत यह है कि यहां से तमाम वरिष्ठ अधिकारियों की गाडिय़ां अंदर जाएंगी और बाहर आएंगी। सिर्फ साहब लोगों की गाडिय़ां ही इस नाके से गुजरें इसका ख्याल रखने के लिये वहां एक कर्मचारी भी तैनात किया गया है। हैरानी की बात यह है कि कर्मचारियों को बैठने के लिए ना छाया है और ना पीने के लिए पानी। बारिश होने पर छाते की व्यवस्था भी खुद किसी कर्मचारी ने कर रखी है। इस कर्मचारी को हिदायत दी गई है कि इस गेट से केवल साहब लोग ही अंदर जाएंगे और बाहर आएंगे। आमजन को यदि कलेक्ट्रेट के अंदर जाना है तो वह एक लम्बी दूरी का चक्कर लगाकर पहले बह बलीबाबा रोड से बाउण्ड्री के अंदर  दाखिल हो, फिर सीधा चलता हुआ पहले हीरा बाग वाले सिरे पर पहुंचे फिर वहां से राईट टर्न लेकर पूरा रास्ता नापता हुआ मुख्य बिल्डिंग के पिछले हिस्से में पहुंचे। जहां से वह अंदर दाखिल हो सकता है। इतना ही नहीं कलेक्ट्रेट भवन में प्रवेश करने के बाद कोरोना वायरस से बचने के लिए आमजनों के लिए तो कम से कम कोई संसाधन उपलब्ध नहीं है। जैसे हैंड सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंस के साथ साथ कोई तापमान नापने की सुविधा जैसे मापदंड भी यहां बिल्कुल  नहीं अपनाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर कलेक्ट्रेट परिसर इन दिनों साहब लोगों की सुविधा के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है जबकि आमजन यहां अपने रिस्क पर ही पूरे परिसर में आ जा सकता है।

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