खाद के लिए मशक्कत करता अन्नदाता, खाद मांगने पर तहसीलदार पर किसान से अभद्रता करने का आरोप


CLICK -

गुना। (प्रदेश केसरी) बाजार में खाद-बीज की दुकानों सहित कृषि उपकरणों की दुकानों पर किसानों की भीड़ उमड़ रही है। इसके अलावा सोसायटी में भी बड़ी संख्या में किसान खाद बीज लेने के लिए मशक्कत करते नजर आए। इस दौरान किसान गुरुवार की सुबह से ही लंबी-लंबी कतारों में लग गए। जिले की मधुसूदनगढ़ क्षेत्र में खाद नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश देखा गया। खाद की मांग को लेकर जब बारोद ग्राम निवासी रमेश पुरी  ने तहसीलदार से गुहार लगाई तो तहसीलदार ने उनसे अभद्रता की। इस बारे में जब तहसीलदार सत्येन्द्र सिंह से संपर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
दरअसल अब पूरे क्षेत्र में गेहूं एवं चने सहित अन्य उपज की बोवनी होने जा रही है। गेहूं एवं चने की बोवनी को लेकर किसानों में भारी उत्साह नजर आ रहा है। फिलहाल मौसम भी अनुकूल है तथा इस वर्ष बारिश अच्छी होने से पानी भी पर्याप्त मात्रा में है। इससे गेहूं एवं चने की फसल जोरदार होने की संभावना बन गई है। किसान जहां खाद एवं बीज ले जा रहे हैं वहीं सिंचाई के लिए मोटर पंप, पाईप सहित उपकरण भी ले जा रहे हैं। गुरुवार को खाद-बीज तथा कृषि उपकरणों की दुकानों में सुबह से शाम तक किसानों की भीड़ बनी रही। किसान बोवनी की जरूरतों का सामान ले जाते रहे। कृषकों ने बताया कि खेत तैयार कर लिए हैं तथा यह बोवनी का उपयुक्त समय है। इसलिए पूरे क्षेत्र के किसान बोवनी में जुटे हुए हैं।

इस वर्ष बढ़ेगा बुवाई का रकबा


इस वर्ष लॉकडाउन के कारण ग्रामीण अंचलों में बड़ी संख्या में बाहर गए लोग वापस गांव आकर खेती कर रहे हैं। इसलिए गांवों में ऐसी भूमि जिस पर वर्षों से फसल नहीं उगाई गई है, उसे भी उपयोग में लाया जा रहा है। विगत मार्च के बाद बड़ी संख्या में दूरदराज से लोग अपने गांवों में वापस आए तो फिर शहर की ओर रूख नहीं किया। इससे वे गांव में ही कृषि कार्य करने का जुगाड़ लगा रहे हैं। ऐसी स्थिति में पूरे क्षेत्र में पहले से अधिक भूमि पर कृषि की जा रही है। इससे कृषि का रकबा भी बढऩे की संभावना है। किसानों ने बताया कि कोरोना काल के कारण बाहर से आए युवक अपने गांव में ही खेती करना पसंद कर रहे हैं। इसलिए बेकार पड़ी हुई भूमि को भी जोतकर खेती की जा रही है।

गांव सूने, खेत गुलजार हुए


पूरे क्षेत्र में बोवनी होने के कारण फिलहाल गांव सूने नजर आ रहे हैं वहीं खेत गुलजार हैं। किसान अधिकांश समय खेत बनाने तथा बोवनी में लगा रहा है। प्राय: किसानों के खेतों में भी घर होने से वे खेत में ही रह रहे हैं। कई किसान अलसुबह गांव से खेत की ओर निकलते हैं तो फिर देर शाम ही घर पहुंचते हैं। इसलिए गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। इधर किसानों द्वारा बुवाई करने से खेतों में रौनक है तथा किसानों के परिवार खेत में बोवनी के लिए जुटे हुए हैं। किसानों के अनुसार उनका अधिकांश समय खेतों में ही गुजर रहा है। इसलिए गांवों में सिर्फ वृद्ध लोग ही नजर आ रहे हैं।

Post a Comment

0 Comments