जानिये दीपावली पर लक्ष्‍मी पूजन का शुभ मुहूर्त एवं विधि


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उज्जैन। (प्रदेश केसरी) दीपावली पर्व को दीप उत्सव भी कहा जाता है। क्योंकि दीपावली का मतलब होता है दीपों की अवली यानि पंक्ति। दिवाली या दीपावली हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिनों तक चलने वाला दिवाली का पर्व भारत और नेपाल समेत दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है। दिवाली का पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायी भी दीपावली के पर्व को बड़े धूमधाम से मनाते हैं। 

लक्ष्मी पूजा शुभ  मुहूर्त्त :


ज्योतिषाचार्य गोविंद उपाध्याय से मिली जानकारी के अनुसार दिनांक 14 नवम्बर शनिवार को निम्न स्थानों पर प्रदोष युक्त स्थिर लग्न शुभ ग्रह होरा के अंतर्गत शुभ मुहूर्त का योग बन रहा है।
दिल्ली - शाम 5:29 से 7:24
मुंबई - शाम 6:01 से 8:01
लखनऊ - शाम 5:18 से 7:15
हरिद्वार - शाम 5:23 से 7:19
कोलकाता - शाम 4:55 से 6:54
नोएडा - शाम 5:29 से 7:25
जयपुर - शाम 5:28 से 7:35
भोपाल - शाम 5:41 से 7:39
इंदौर - शाम 5:44 से 7:42
ग्वालियर - शाम 5:29 से 7:25
उज्जैन - शाम 5:43 से 7:41
गुना - शाम 5:35 से 7:32

पूजन विधि


ज्योतिषाचार्य के अनुसार सर्वप्रथम माँ लक्ष्मी व गणेशजी की प्रतिमाओं को चौकी पर रखें। ध्यान रहें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर रहें और लक्ष्मीजी की प्रतिमा गणेशजी के दाहिनी ओर रहें।
कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेट कर उसे कलश पर रखें। यह कलश वरुण का प्रतीक होता है।
एक दीपक को घी और दूसरें को तेल से भर कर और एक दीपक को चौकी के दाईं ओर और दूसरें को लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं के चरणों में रखें।
लक्ष्मी-गणेश के प्रतिमाओं से सुसज्जित चौकी के समक्ष एक और चौकी रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। उस लाल वस्त्र पर चावल से नवग्रह बनाएं। साथ ही रोली से स्वास्तिक एवं ॐ का चिह्न भी बनाएं।
पूजा करने हेतु उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे।
तत्पश्चात केवल प्रदोष काल में ही माता लक्ष्मी की पूजा करें। माता की स्तुति और पूजा के बाद दीप दान भी अवश्य करें।
लक्ष्मी पूजन के समय लक्ष्मी मंत्र का उच्चारण करते रहें – ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:

दिवाली पर क्या करें?


  1. कार्तिक अमावस्या यानि दीपावली के दिन प्रात:काल शरीर पर तेल की मालिश के बाद स्नान करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से धन की हानि नहीं होती है।
  2. दिवाली के दिन वृद्धजन और बच्चों को छोड़कर् अन्य व्यक्तियों को भोजन नहीं करना चाहिए। शाम को महालक्ष्मी पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करें।
  3. दीपावली पर पूर्वजों का पूजन करें और धूप व भोग अर्पित करें। प्रदोष काल के समय हाथ में उल्का धारण कर पितरों को मार्ग दिखाएं। यहां उल्का से तात्पर्य है कि दीपक जलाकर या अन्य माध्यम से अग्नि की रोशनी में पितरों को मार्ग दिखायें। ऐसा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  4. दिवाली से पहले मध्य रात्रि को स्त्री-पुरुषों को गीत, भजन और घर में उत्सव मनाना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में व्याप्त दरिद्रता दूर होती है।

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