नेशनल लोक अदालत में आपसी राजीनामे से सुलझेे 621 मामलें

लगभग 2 करोड राशि के अवार्ड पारित, 951 व्यक्ति हुए लाभांवित



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गुना। (प्रदेश केसरी) जिला मुख्यालय सहित सिविल न्यायालय चांचौड़ा, राघौगढ़, आरोन में शनिवार को ऑनलाईन ऑफलाईन माध्यम से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। उक्त नेशनल लोक अदालत में 22 खंडपीठों ने 621 मामलों का राजीनामे में आपसी समझौते के आधार पर निराकरण कराया। इस दौरान करीब 19482395 रुपए की राशि के अवार्ड पारित किए गए। जिससे 951 व्यक्तियों को लाभांवित हुए। निराकृत किए गए मामलों में न्यायालयों में लंबित 113 मामलों में 14835168 रुपए की राशि के अवॉर्ड पारित हुए तथा बैंक, नगरपालिका, विद्युत व बी.एस.एन.एल. के 379 पूर्ववाद प्रकरणों में 4114227 रुपए की राशि लोक अदालत के माध्यम से वसूल की गयी।
इसके पूर्व नेशनल लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ  प्रात: एडीआर सेंटर गुना के सभागार में विशेष न्यायाधीश प्रदीप मित्तल ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर किया। इस अवसर पर, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय काशिफ नदीम खान, अपर जिला जज संजय चतुर्वेदी, अशवाक् अहमद खान, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एके मिश्र, अपर जिला जज हर्षसिंह बहरावत, प्रदीप दुबे, सचिन कुमार घोष, सीजेएम कौषलेन्द्र सिंह भदौरिया, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ प्रशांत सिसौदिया, पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता संघ वरूण सूद, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एमकेवर्मा, तनवीर खान, सुनील कुमार खरे, भूपेन्द्र कुशवाह, अमोघ अग्रवाल, मानवेन्द्र सिंह यादव, ऋचा द्विवेदी, प्रीति परिहार, जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा, न्यायालय अधीक्षक राकेश चतुर्वेदी सहित अधिवक्तागण, बैंक, विघुत, नगरपालिका के अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।  
न्यायालय में आये थे अलग होने, लोक अदालत में हुए एक
इस दौरान न्यायालय में अलग होने के लिए पति-पत्नि के बीच तलाक के दो मामलों में कुटुम्ब न्यायालय के पीठासीन अधिकारी काशिफ नदीम खान एवं सुलहकर्ता सदस्यों की समझाईश पर पति-पत्नि तलाक का मामला वापिस लेने को तैयार हो गए। बच्चों की खातिर एक साथ रहकर जीवन यापन करने को राजी हुए।
जिला पंचायत की दुकानों के दो मामले किए निराकृत
वहीं न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेन्द्र कुशवाह की पीठ ने जिला पंचायत काम्प्लेक्स के सामने की दुकान नं. 25 व 27 के किराये के संबंध में चल रहे मामले में कोविड-19 महामारी के कारण कुछ माह का किराया माफ  किया गया। पक्षकार द्वारा पूर्व में जमा राशि को कम किया जाकर शेष राशि कम कराई।

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