गुना में भार्गव कृषि फार्म पर कल सेे बहेगी रामकथा की गंगा

ख्याति प्राप्त संत प्रेमभूषण महाराज करेंगे कथा का वाचन


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गुना। (प्रदेश केसरी) शहर में भार्गव कृषि फार्म पर स्व. पंडित काशीनाथ भार्गव की पुण्य स्मृति में 26 दिसम्बर से 3 जनवरी तक श्रीरामकथा का आयोजन किया जा रहा है। इस बार कथा का ये 12 वां वर्ष है। इस कथा में कथावाचक प्रेमभूषण महाराज के मुखारविंद से अविरल रामकथा की रसगंगा प्रवाहित होगी। कोविड-19 महामारी के चलते कथा स्थल पर कार्यक्रम को लेकर कई सावधनियां बरती जाएगी। इस दौरान कथा के पूर्व निकलने वाली कलश यात्रा को भी सूक्ष्म रूप से निकाला जाएगा। 26 दिसंबर को कथा की शोभायात्रा चुनिंदा लोगों की उपस्थिति में शिमला गार्डन से कथा स्थल तक निकाली जाएगी। वहीं कथा के लिए लगाया गए पांडाल में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ भक्तों को बैठने की व्यवस्था कुर्सियों पर की गई है। कथा का प्रचारण विभिन्न चैनलों के साथ सोशल मीडिया पर भी किया जाएगा। शुक्रवार को कथा की तैयारियों के सिलसिले में भार्गव कृषि फार्म पर  पत्रकारवार्ता का आयोजन किया गया। इसमें कथा आयोजक पंडित नर्मदाशंकर भार्गव, गिर्राज भार्गव, आनंद भार्गव ने संयुक्त रूप से बताया कि उनके पूज्य पिताजी काशीनाथ भार्गव ने निरंतर 12 वर्ष तक सफल भागवत कथा का संकल्प लिया था। उनके पिता ने कथा के ज्ञान को मानव जीवन में समर्पित कर भगवान राम के जीवन चरित्र को घर-घर और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया था। लेकिन असमय उनके छोड़कर जाने के बाद अपने पिता के इस अधूरे संकल्प को उन्होंने आमजनों के सहयोग से अपना संकल्प बनाया है। उन्होंने बताया कि विगत वर्षों में गुना की धरती पर अनेकों राष्ट्रीय संतों ने पहुंचकर कथा कराई। पूर्व में प्रेमभूषण जी महाराज, राघावाचार्य जी महाराज , जगतगुरू रामभद्राचार्य जी महाराज , महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा अर्जुन पुरी जी महाराज, मलूक पीठाधीश्वर राजेन्द्रदास जी महाराज,  राममनोहर जी महाराज , रत्नेश जी महाराज, रमेश भाई ओझा जी समेत राष्ट्रीय संतों के सानिध्य में कार्यक्रम संपन्न हुए।

पूज्य संत श्री प्रेमभूषण जी महाराज का संक्षिप्त परिचय

भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। भारत भूमि ने समय-समय पर अपनी गोद में अनेक संतों को जन्म दिया करती है। इसी कड़ी में माँ भारती ने उत्तर प्रदेश की पावन माटी व तीनों लोकों और चौदहों भुवनों के तीर्थों के राजा महर्षि भारद्वाज जी की तपस्थली तीर्थराज प्रयाग में सन् १९६९ की २१ जनवरी दिन मंगलवार को पूजनीया माता दुर्गावती देवी जी के अंक से श्री रामचरितमानस को पूज्यपाद् तुलसीदास जी महाराज की भावान्जली में प्रस्तुत करने हेतु प्रेममूर्ति पूज्य संत श्री प्रेमभूषण जी महाराज को जन्म दिया। नियति क्या कराना चाहती है उसे ही पता है वैसी ही रचना बनती चली जाती है। पूज्यश्री का बचपन ननिहाल पक्ष में नितान्त अभावों में बीता। प्रारम्भिक शिक्षा ननिहाल में पूर्ण कर महाराज श्री स्नातक की पढ़ाई करने कानपुर आ गये । स्नातक के बाद परास्नातक की पढ़ाई भी उन्होंने कानपुर से ही पूर्ण की । स्वभाव से सरल , शालीनता से परिपूर्ण पूज्यश्री गुरुजनों के हमेशा लाडले रहे । पूज्यश्री १९८९ में अध्यापन हेतु श्रीअवध गए । यही से अनेक संत महापुरुषों के संपर्क में आये और सत्संगति मिलने पर धुन के पक्के पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज के रूप में सनातन जगत को एक रामकथाकर की प्राप्ति हुई।

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