परिस्थितिजन्य साक्ष्य को सिद्ध करने में डिजिटल टूल्स व सायबर विधि अत्यन्त सहायक सिद्ध हो सकते हैं - न्यायमूर्ति श्री शील नागू

  • फॉरेंसिक विज्ञान को प्रारंभ से ही शैक्षिक पाठ्यक्रम में सम्मिलित करते हुए करनी होगी फॉरेंसिक साईंस विश्वविद्यालयों की स्थापना - न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक
  • जिला न्यायालय गुना द्वारा साइबर विषय पर आयोजित किया गया वेबिनार


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गुना। (प्रदेश केसरी) व्यक्ति झूठ बोल सकता है, किंतु परिस्थितियां कभी झूठ नहीं बोलती बशर्ते उन्हें सही से साबित किया जाए। भारतीय विधि में प्रत्यक्ष साक्ष्य व्यक्ति पर निर्भर होता है जबकि परिस्थितिजन्य साक्ष्य अप्रत्यक्ष श्रेणी की साक्ष्य होती है। यदि साक्षी झूठ बोलता है तब न्याय तक पहुंचने में परिस्थितियों को सही रूप से साबित कर अपराधी के अपराध को प्रमाणित किया जा सकता है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य को साबित करने में डिजिटल टूल्स व साइबर विधि सहायक सिद्ध हो सकते हैं। उक्त विचार जिला न्यायालय गुना द्वारा न्यायाधीशों, अभियोजन एवं पुलिस अधिकारियों और अधिवक्ताओें के लिये साइबर विधि पर आयोजित किये गये वेबिनार में उच्च न्यायालय खण्डपीठ, ग्वालियर के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू ने व्यक्त किये। 
कार्यक्रम में उच्च न्यायालय खण्डपीठ, ग्वालियर के न्यायमूर्ति एवं जिला न्यायालय गुना के पोर्टफोलियो जज न्यायमूर्ति आनंद पाठक द्वारा व्यक्त किया गया कि विधि के शासन को स्थापित करने के लिए आज की स्थिति में यह आवश्‍यक है कि प्रारंभ से ही फॉरेंसिक अनुसंधान व फॉरेंसिक विज्ञान को पढा़या जाए। इसके लिए यथा संभव फॉरेंसिक विश्वविद्यालयों की स्थापना की जानी चाहिए। ताकि प्रारंभिक स्तर से ही फॉरेंसिक एवं डिजिटल टूल्स को  समझने के लिए शैक्षणिक वातावरण तैयार हो सके। इसके अलावा श्री पाठक ने व्यक्त किया कि जिस प्रकार विश्‍वविद्यालय व महाविद्यालय में लाईब्रेरी का स्थान है उसी प्रकार अन्वेषण व न्याय प्रशासन में आज के समय में डिजिटल वर्ल्‍ड, फॉरेंसिक विज्ञान व साइबर विषेज्ञता का स्थान है। यही वे साधन है जो हमें सत्य तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। न्याय प्रशासन में पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता व न्यायाधीश एक ही मंच पर आकर सत्य तक पहुंचने का कार्य करते हैं। डिजिटल टूल्स न केवल अपराधों को रोकने में सहायक है बल्कि अपराधी का पता लगाने व अपराध को प्रमाणित करने में भी सहायक होते हैं। इसलिए साइबर टूल्स के ज्ञान व उपयोग के प्रति सभी स्टेक होल्डर्स को जागरूक होने की आवश्‍यकता है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षक के रूप में देश के प्रसिद्ध साईबर विशेषज्ञ रक्षित टंडन द्वारा ’’साईबर क्राईम्स, इससे संबंधित चुनौतियां, डिजीटल फुटप्रिंट्स, अन्वेषण में ओपन सोर्स की महत्ता, मेटाडेटा एवं फॉरेंसिक प्रक्रिया, डेटा भंग एवं इसका प्रभाव इत्यादि’’ विषयों पर सहज एवं सरल भाषा में प्रशिक्षण दिया गया तथा श्री रक्षित टंडन द्वारा भी फॉरेंसिक साईंस शिक्षा प्रारंभिक स्तर से दिये जाने तथा फॉरेंसिक साईंस यूनिवर्सिटीज की स्थापना किये जाने की आवश्‍यकता व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति आनंद पाठक के विचारों का समर्थन किया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव, विधि विभाग, म0प्र0 शासन सतेन्द्र कुमार सिंह एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, साइबर सेल ए0साईं0 मनोहर सहित न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, अभियोजन और पुलिस अधिकारीगण एवं अन्य गणमान्य श्रोता ऑनलाईन (वर्चुअली) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण जिला एवं सत्र न्यायाधीश  राजेश कुमार कोष्टा द्वारा दिया गया तथा कार्यक्रम का संचालन सिविल जज सुश्री प्राची पाण्डेय द्वारा तथा आभार प्रदर्शन कार्यक्रम के समन्वयक व अपर जिला जज  हर्ष सिंह बहरावत द्वारा किया गया।

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