जेल आत्मचिंतन तथा अपराध के प्रायश्चित किए जाने का स्थान - श्री कोष्टा

 जिला जेल गुना में विधिक साक्षरता शिविर संपन्न



CLICK -

गुना। (प्रदेश केसरी) कानून की नजर में जेल पाप भोगने का स्थल न होकर आत्मचिंतन व अपराध के प्रायश्चित किए जाने का स्थान है। कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति जन्मजात अपराधी नहीं होता, अपराध के समय की परिस्थितियां, क्रोध, संगत एवं अन्य कारक भी अपराध का कारण हो सकते हैं। इसलिए हर बंदी को अपने जेल में बिताए समय का सदुपयोग करते हुए अपने आचरण में सुधार कर, जेल से मुक्त होने पर समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित होने के लिए प्रयास करना चाहिए। उक्त विचार जिला न्यायाधीश राजेश कुमार कोष्टा ने जिला जेल गुना में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। इस मौके पर उन्होंने नशे को अपराध का मूल कारक मानते हुए बंदियों को नशे की आदत से दूर रहने की हिदायत दी। कार्यक्रम में विशेष न्यायाधीश धमेन्द्र सिंह द्वारा जमानत संबंधी उपबंध एवं जेल लोक अदालत के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। एके मिश्र द्वारा विचाराधीन बंदियों के संबंध में  माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों की जानकारी के साथ-साथ प्लीवार्गेंनिग, बंदियों को उपलब्ध नि:शुल्क एवं सक्षम विधिक सहायता के बारे में अवगत कराया गया। कार्यक्रम में सीजेएम कौशलेन्द्र सिंह भदौरिया, जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा व वरिष्ठ जेल उपाधीक्षक रामलाल सहलाम ने भी बंदियों के अधिकार व उनको जेल मेन्युअल के अंतर्गत प्राप्त सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर जेल का स्टॉफ व विचाराधीन बंदी उपस्थित रहे।

Post a Comment

0 Comments