तीनों भैयाजियों की निकली बैराग्य की बारात, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

कैशलोंच कर अपने हाथों से निकालें सिर एवं दाढ़ी के बाल, आज वस्त्राभूषण छोड़कर बनेंगे निग्र्रंथ साधु



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गुना। (प्रदेश केसरी) सांसरिक जीवन को छोड़कर कठोर तपस्या और संयम का मार्ग अपनाने जा रहे तीन ब्रह्मचारी भैयाजियों की जैनेश्वरी दीक्षाएं शुक्रवार को बीजी रोड स्थित नसियांजी में होगी। इसके पूर्व तीनों ब्रह्मचारियों भैयाजियों की बैराग्य की बारात गुरुवार को शहर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई। राजसी पोशाक में बग्गी में बैठकर तीनों भैयाजी सन्तोष भैयाजी सागर, प्रेमचंद भैयाजी बंडा एवं ब्रह्मचारी सागर भैया अक्किवाट की बिनौली शोभायात्रा चौधरी मोहल्ला स्थित पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर से आरंभ हुई। जो निचला बाजार, सदर बाजार, सुगन चौराहा, नई सड़क, पण्डाजी चौराहा से होते हुए पुन: बड़ा मन्दिर पहुंची। यहां शाम को आचार्यभक्ति के उपरांत जैनेश्वरी दीक्षा की सबसे कठिन परीक्षा केशलोंच हुआ। इस दौरान तीनों ब्रह्मचारी भैयाजियों ने अपने हाथों से सिर एवं दाढ़ी के बाल निकाले। जिसे देखकर श्रद्धालुओं भावविभोर हो उठे। बिनौली यात्रा का जगह-जगह शहरवासियों ने स्वागत किया।
इसके पूर्व गुरुवार को प्रात: काल मंगलाष्टक, श्रीजी के अभिषेक, शांतिधारा पूजन हुई। वहीं शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में होने जा रहे विधान की घटयात्रा शुरू हुई। इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन, शास्त्रदान, विधान के उत्तम पात्रों की बोलियाँ उपरान्त आचार्यश्री एवं मुनिराजों के प्रवचन हुए। वहीं दोपहर में महावीर भवन में तीनों ब्रह्मचारी भैयाजियों ने अपने परिजनों एवं अन्य श्रद्धालुओं के साथ गणधर बलय विधान किया।

शुक्रवार को होगी दीक्षाएं


राग से बैराग्य की ओर बढ़ चले तीन भैयाजी शुक्रवार सुबह आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज के सानिध्य में संसार की मोहमाया को तजकर जैनेश्वरी दीक्षाएं लेंगे। इस मौके पर नसियांजी जी प्रांगण में प्रात: 7 बजे से दीक्षाएं की क्रियाएं शुरू हुईं। यहां आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज तीनों ब्रह्मचारियों के अलावा संघ के एक अन्य ऐलकश्री को जैसे जैनेश्वरी दीक्षा देेंगे तो तीनों भैयाजी शरीर पर धारण वस्त्रों को निकाल फेंकेेगे और निग्र्रंथ साधु की नई जीवन यात्रा शुरू करेंगें।

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